प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर कमल किशोर गोयनका का निधन, साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति

Tue 01-Apr-2025,08:47 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर कमल किशोर गोयनका का निधन, साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति
  • डॉक्टर कमल किशोर गोयनका का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। 11 अक्टूबर 1938 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जन्मे डॉक्टर गोयनका जी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए, एमफिल, प्रेमचंद पर पीएचडी और डी.लिट की उपाधि प्राप्त की थी। 

  • डॉक्टर गोयनका ने हिंदी में प्रेमचंद की जीवनी का पहली बार कालक्रमानुसार लेखन किया और प्रेमचंद पर 22 पुस्तकें, प्रवासी साहित्य पर छह पुस्तकें, और अन्य लेखकों पर 20 पुस्तकें लिखी। उनके द्वारा प्रकाशित-संपादित तीन प्रतिनिधि संकलन और तीन सौ से अधिक लेख, शोध-पत्र उनकी साहित्यिक कार्यशैली को प्रमाणित करते हैं. 

Delhi / New Delhi :

हिंदी जगत के प्रख्यात साहित्यकार डॉक्टर कमल किशोर गोयनका का मंगलवार सुबह राजधानी के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। उनके बड़े पुत्र संजय गोयनका ने बताया कि 9 मार्च से डॉक्टर गोयनका को सांस लेने में कष्ट हो रहा था, जिसके बाद उन्हें राजधानी के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। पहले उन्हें आईसीयू में रखा गया, फिर उन्हें सांस लेने में सहायता के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया। उन्होंने वेंटिलेटर पर आज सुबह साढ़े सात बजे अंतिम सांस ली।

डॉक्टर कमल किशोर गोयनका का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। 11 अक्टूबर 1938 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जन्मे डॉक्टर गोयनका जी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए, एमफिल, प्रेमचंद पर पीएचडी और डी.लिट की उपाधि प्राप्त की थी। वे केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष रहे। प्रेमचंद के जीवन, विचार और साहित्य के विशेषज्ञ के रूप में वे प्रसिद्ध थे और दशकों तक उनके साहित्य पर कार्यरत रहे।

डॉक्टर गोयनका ने हिंदी में प्रेमचंद की जीवनी का पहली बार कालक्रमानुसार लेखन किया और प्रेमचंद पर 22 पुस्तकें, प्रवासी साहित्य पर छह पुस्तकें, और अन्य लेखकों पर 20 पुस्तकें लिखी। उनके द्वारा प्रकाशित-संपादित तीन प्रतिनिधि संकलन और तीन सौ से अधिक लेख, शोध-पत्र उनकी साहित्यिक कार्यशैली को प्रमाणित करते हैं। प्रेमचंद के मूल दस्तावेज़, पत्र, डायरी, फोटोग्राफ, पाण्डुलिपि आदि लगभग तीन हजार दुर्लभ सामग्री का उन्होंने स्वयं संग्रहण किया, जो उनके अद्वितीय योगदान का प्रतीक है।

डॉक्टर गोयनका जी को दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी अनुसंधान परिषद का आजीवन सदस्य होने का सम्मान प्राप्त था। वे कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए थे, जिनमें हिंदी अकादमी (दिल्ली), भारतीय भाषा परिषद (कोलकाता), और व्यास सम्मान प्रमुख हैं। वे प्रेमचंद शताब्दी वर्ष 1980 से अब तक लगभग सत्तर नगरों, विश्वविद्यालयों, अकादमियों और साहित्यिक संस्थाओं में आमंत्रित हुए और सम्मानित हुए।

उनका निधन साहित्य जगत में गहरी शोक की लहर छोड़ गया है। साहित्य परिषद परिवार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करता है।