भार ढोने वाले पशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत- डॉ. अनिल सिंह
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पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशुओं के अधिकारों और देखभाल के बारे में जानकारी दी गई।
पशु क्रूरता निवारण एवं देखभाल विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
Kaushambi/आज दिनांक 21 मार्च, 2025 को विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में विराट पशु गर्दभ मेला कड़ा, तहसील सिराथू कौशाम्बी के ऐतिहासिक गर्दभ मेला मैदान में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण एवं देखभाल विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में डॉ. नरेन्द्र दिवाकर द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पशुओं को अनावश्यक पीड़ा या यातना पहुंचाने के निवारणार्थ और उस प्रयोजन के लिए पशुओं के संरक्षण हेतु पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 है। पशु मानव जीवन और सह-अस्तित्व के सबसे बड़े सहयोगी हैं इसलिए पशु स्वामियों का कर्तव्य है कि वे पशुओं को अनावश्यक पीड़ा न पहुंचाएं एवं उन्हें किसी के द्वारा पीड़ा पहुंचाने से रोकें व उनकी आवश्यक देखभाल करें। पशुओं के जीवन को संकटापन्न करने वाली किसी परिस्थिति में उनका परिवहन करना, उनके जीवन को संकटापन्न करने के आशय से भोजन पानी आदि का लोप करना, वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास, जो अन्यून एक वर्ष होगी और जो सात वर्ष तक हो सकती है, से और एसे जुर्माना, जो अन्यून एक लाख रुपये होगा, और जो तीन लाख रुपये तक हो सकता है, से दण्डित किया जायेगा।
पशु चिकित्साधिकारी कड़ा, कौशाम्बी डा. अनिल सिंह ने बताया कि अश्व प्रजाति के पशु सदैव मनुष्य के दैनंदिन जीवन में सहयोगी रहे हैं। भार ढोने वाले पशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ग्लैण्डर्स एन्ड फार्सी जैसी बीमारी लाइलाज है, इसमें पशु पालकों को पशु का शिशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है क्योंकि इससे पशुपालकों को भी खतरा हो सकता है। कोलिक अश्व में पेटदर्द की बीमारी है इससे बचने के लिए दिन भर में 6 से 7 बार पानी पिलाकर व कीड़े मारने वाली दवा 6 माह के अन्तराल पर देते रहें।
गंगा गोमती संस्थान के अध्यक्ष विनय पांडेय ने बताया कि पशुओं से भी प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। पशुओं की भावनाओं को समझें और उनका ध्यान रखें कि वे काम क्यों नहीं करना चाहते? पशु भी सम्मान के भूखे होते हैं। बेवजह उनको यातना देने से बचें जिससे वे ताउम्र आपका साथ देते रहें।
ब्रुक इंडिया कौशाम्बी के फील्ड असिस्टेंट सुदामा प्रसाद ने बताया कि अक्सर पशु स्वामी अधिक भर लाद देते हैं जो कि पशु को पीड़ा तो पहुंचाता ही है साथ ही पशु को चोटिल भी करता है। उनके रखरखाव के लिए जरूरी है कि छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना चाहिए। लकड़ी के खूंटे और लोहे के रॉड से पशुओं को नहीं बंधना चाहिए। किसी भी प्रकार का घाव होने पर नीम की पत्ती उबालकर धुलकर हल्दी पाउडर को सरसों तेल में भिगोकर लगाएं। सर्रा नामक बीमारी होने पर लहसुन के रस को सरसों के तेल में मिलाकर लगाएं। साथ ही उपस्थित सभी लोगों को साक्षरता शिविर में यह संकल्प दिलाया गया कि वे भविष्य में कभी भी किसी पशु के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार नही करेंगे और सभी पशुओं के संरक्षण का प्रयास करेंगे। पीएलवी ममता दिवाकर ने बताया कि किसी भी प्रकार की विधिक सहायता या निःशुल्क पैरवी हेतु अधिवक्ता की आवश्यकता हो तो जिले की सभी तहसीलों में स्थित लीगल एड सेंटर पर उपस्थित पीएलवी से उनका प्रार्थना पत्र तैयार कराकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में उपलब्ध कराएं।
पीएलवी ज्योत्सना सोनकर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा संचालित किये जा रहे विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों और प्रदान की जा रही सुविधाओं आदि के बारे में भी बताया। राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी बताया गया। इस दौरान शिविर में ब्रुक इंडिया कौशाम्बी एवं पशुपालन विभाग द्वारा गधे, घोड़ा, खच्चर आदि का इलाज भी किया गया और जरूरी दवाएं निःशुल्क प्रदान की गईं।
शिविर में आर आई बजरंग प्रसाद, क्षेत्रीय लेखपाल अचल सिंह, लेखपाल रवि प्रकाश, क्षेत्र पर्यवेक्षक नगर पंचायत कड़ा रवि कुमार, ब्रुक इंडिया से अनुराग कुमार, वीरेन्द्र कुमार, पिंटू केशरवानी, विपिन मिश्रा पैरावेट, सहित सैकड़ों की संख्या में पशु स्वामी एवं ग्रामवासी मौजूद रहे।
डॉ. नरेन्द्र दिवाकर
मोब. 9839675023
पीएलवी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी