पटना हाई कोर्ट ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की याचिका खारिज की
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर प्रश्नपत्र लीक हो गया था, लेकिन बीपीएससी ने सिर्फ पटना के बापू सभागार केंद्र की परीक्षा को रद्द किया और 4 जनवरी 2025 को दोबारा आयोजित किया।
परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर पटना में छात्रों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। गर्दनीबाग में हुए प्रदर्शन में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई उम्मीदवार घायल हो गए।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव और जनसुराज के प्रशांत किशोर ने भी छात्रों का समर्थन किया।
पटना हाई कोर्ट ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे परीक्षा दोबारा कराने की उम्मीद लगाए बैठे उम्मीदवारों को झटका लगा है। 13 दिसंबर 2024 को आयोजित इस परीक्षा में लगभग 4 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को राहत मिली है।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें और कोर्ट का फैसला
उम्मीदवारों ने परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए इसे दोबारा कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर प्रश्नपत्र लीक हो गया था, लेकिन बीपीएससी ने सिर्फ पटना के बापू सभागार केंद्र की परीक्षा को रद्द किया और 4 जनवरी 2025 को दोबारा आयोजित किया। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों को छह अतिरिक्त अंक दिए गए, जिससे अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ।
पटना हाई कोर्ट की जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने सभी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने की मांग को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि आयोग द्वारा उठाए गए कदम उचित हैं।
छात्रों का विरोध और राजनीतिक समर्थन
परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर पटना में छात्रों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। गर्दनीबाग में हुए प्रदर्शन में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई उम्मीदवार घायल हो गए। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव और जनसुराज के प्रशांत किशोर ने भी छात्रों का समर्थन किया।
क्या आगे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे उम्मीदवार?
पटना हाई कोर्ट के इस फैसले से उम्मीदवार निराश हैं, लेकिन उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प अभी भी खुला है। अब देखना होगा कि याचिकाकर्ता इस फैसले को चुनौती देते हैं या नहीं।