संशोधित वक्फ विधेयक: लोकसभा में पेश करने की तैयारी, विपक्ष का विरोध जारी
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

सरकार ने संकेत दिया है कि मंगलवार को विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विधेयक पेश करने के समय को लेकर चर्चा की जाएगी। इस दौरान विपक्ष और मुस्लिम संगठनों पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया गया।
रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक को लेकर यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि सरकार इसे लागू करके मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसी मुस्लिम संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लेगी। उन्होंने इसे पूरी तरह से दुष्प्रचार बताया और कहा कि वक्फ को नियंत्रित करने वाले कानून ब्रिटिश काल से अस्तित्व में हैं।
संशोधित वक्फ विधेयक को बुधवार, 2 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा। सरकार ने इस पर आठ घंटे चर्चा के लिए निर्धारित किए हैं, जबकि विपक्ष ने 12 घंटे का समय मांगा है। अल्पसंख्यक एवं संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार (31 मार्च) को कहा कि सरकार इस विधेयक को संसद में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रिजिजू ने कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों पर समाज में अशांति फैलाने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वक्फ विधेयक को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे मुस्लिम समुदाय में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। संसद का चालू बजट सत्र 4 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, इसलिए सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है।
सरकार ने संकेत दिया है कि मंगलवार को विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विधेयक पेश करने के समय को लेकर चर्चा की जाएगी। इस दौरान विपक्ष और मुस्लिम संगठनों पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया गया। रिजिजू ने कहा कि रमजान और ईद के दौरान मुसलमानों को इस विधेयक के खिलाफ काली पट्टियां पहनने के लिए कहा गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हुआ। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को भड़काने की निंदा करते हुए कहा कि सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना देश के हित में नहीं है।
विधेयक को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियां
रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक को लेकर यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि सरकार इसे लागू करके मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसी मुस्लिम संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लेगी। उन्होंने इसे पूरी तरह से दुष्प्रचार बताया और कहा कि वक्फ को नियंत्रित करने वाले कानून ब्रिटिश काल से अस्तित्व में हैं। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब यह कानून लागू हुआ था, तब भी इसे लेकर अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन आज तक किसी भी मुसलमान ने अपनी नागरिकता नहीं खोई है।
उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे विधेयक का गहराई से अध्ययन करें और सरकार के साथ विचार-विमर्श करें। उन्होंने दावा किया कि न केवल एनडीए, बल्कि विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के कई सांसदों ने भी उनसे आग्रह किया है कि इस विधेयक को शीघ्र संसद में पेश किया जाए।
विधेयक के समर्थन और विरोध की राजनीति
रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक अधिकतर मुसलमानों के हित में है, लेकिन कुछ नेता, जिन्होंने निजी लाभ के लिए वक्फ संपत्तियों का दोहन किया है, वे इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने इस विधेयक का समर्थन किया है।
सरकार का दावा है कि इस विधेयक को लाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। हालांकि, विपक्ष इसे एक राजनीतिक हथकंडा बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इसे पारित कराने में सफल होती है या यह एक लंबी राजनीतिक बहस का मुद्दा बनता है।