टीवी जगत के मशहूर राइटर मनोज संतोषी का निधन
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उन्होंने मुंबई में काफी संघर्ष किया। कई बार सड़कों पर रातें बितानी पड़ीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने हुनर को निखारते रहे। धीरे-धीरे उन्हें टीवी इंडस्ट्री में पहचान मिलनी शुरू हुई और वह एक सफल लेखक के रूप में उभरे।
मनोज संतोषी ने भारतीय टेलीविजन के कई लोकप्रिय कॉमेडी शोज के लिए स्क्रिप्ट लिखी। उनके लेखन की खासियत उनकी कॉमिक टाइमिंग और आम जीवन की रोचक घटनाओं को मजेदार अंदाज में पेश करना था।
उन्होंने ‘भाभीजी घर पर हैं’, ‘हप्पू की उलटन पलटन’, ‘जीजा जी छत पर हैं’, ‘मैडम मे आई कम इन’ और ‘FIR’ जैसे कई हिट शो लिखे।
मनोज संतोषी के निधन से टेलीविजन इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनके सहयोगी और प्रशंसक उन्हें याद कर रहे हैं और उनकी रचनात्मकता को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
टेलीविजन की दुनिया के जाने-माने लेखक मनोज संतोषी का सोमवार को हैदराबाद में निधन हो गया। वह लंबे समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे और हैदराबाद के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मनोज संतोषी ने अपने करियर में कई हिट कॉमेडी शोज लिखे, जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे।
उत्तर प्रदेश से मुंबई तक का सफर
मनोज संतोषी का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के रामघाट में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कस्बा जरगंवा स्थित इंटर कॉलेज से पूरी की। उनका सपना गायक बनने का था, और इसी उद्देश्य से वह मुंबई गए थे। लेकिन वहां एक लेखक से मुलाकात के बाद उन्होंने लेखन को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
इस दौरान उन्होंने मुंबई में काफी संघर्ष किया। कई बार सड़कों पर रातें बितानी पड़ीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने हुनर को निखारते रहे। धीरे-धीरे उन्हें टीवी इंडस्ट्री में पहचान मिलनी शुरू हुई और वह एक सफल लेखक के रूप में उभरे।
टीवी के हिट शो लिखे
मनोज संतोषी ने भारतीय टेलीविजन के कई लोकप्रिय कॉमेडी शोज के लिए स्क्रिप्ट लिखी। उनके लेखन की खासियत उनकी कॉमिक टाइमिंग और आम जीवन की रोचक घटनाओं को मजेदार अंदाज में पेश करना था। उन्होंने ‘भाभीजी घर पर हैं’, ‘हप्पू की उलटन पलटन’, ‘जीजा जी छत पर हैं’, ‘मैडम मे आई कम इन’ और ‘FIR’ जैसे कई हिट शो लिखे।
उनका लिखा हुआ हर शो दर्शकों को खूब हंसाता था और टीवी पर लंबे समय तक छाया रहा। खासतौर पर ‘भाभीजी घर पर हैं’ और ‘FIR’ जैसे शो ने उन्हें एक सफल कॉमेडी राइटर के रूप में स्थापित किया।
परिवार की यादें और अंतिम संस्कार
उनकी भतीजी कल्पना ने बताया कि मनोज संतोषी अक्सर अपने पैतृक शहर अनूपशहर आते थे और उन्हें कल्पना के हाथ की चाय बहुत पसंद थी। परिवार ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को हैदराबाद से उनके गांव रामघाट लाया जा रहा है, जहां पूरे रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मनोज संतोषी के निधन से टेलीविजन इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनके सहयोगी और प्रशंसक उन्हें याद कर रहे हैं और उनकी रचनात्मकता को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनका जाना हिंदी टेलीविजन जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।