पादरी बजिंदर सिंह को उम्रकैद की सजा
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फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता ने कहा कि बजिंदर एक मनोरोगी है और जेल से बाहर आने के बाद भी अपराध करेगा।
बजिंदर सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 323 (चोट पहुंचाने की सजा) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी पाया गया। 2018 में जीरकपुर थाने में एक महिला ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
यह सजा ऐसे समय आई है जब पादरी एक अन्य यौन उत्पीड़न के मामले में जांच का सामना कर रहा है। 28 फरवरी को कपूरथला पुलिस ने उसके खिलाफ एक 22 वर्षीय महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
पंजाब के मोहाली की एक अदालत ने विवादित पादरी बजिंदर सिंह को 2018 के बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 28 मार्च को अदालत ने उसे दोषी ठहराया था, और एक अप्रैल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रांत कुमार ने यह फैसला सुनाया।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता ने कहा कि बजिंदर एक मनोरोगी है और जेल से बाहर आने के बाद भी अपराध करेगा। उसने कहा कि यह न केवल उसकी, बल्कि कई अन्य पीड़ित महिलाओं की जीत है। साथ ही, उसने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की, क्योंकि उसे हमले का डर है।
बजिंदर सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 323 (चोट पहुंचाने की सजा) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी पाया गया। 2018 में जीरकपुर थाने में एक महिला ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि बजिंदर ने विदेश भेजने का झांसा देकर मोहाली के सेक्टर-63 स्थित अपने आवास पर उसके साथ बलात्कार किया और उसका वीडियो भी बना लिया। बाद में उसने धमकी दी कि अगर उसकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देगा।
अदालत परिसर में फैसले से पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इस मामले में पांच अन्य आरोपियों – अकबर भट्टी, राजेश चौधरी, जतिंदर कुमार, सितार अली और संदीप पहलवान को बरी कर दिया गया।
यह सजा ऐसे समय आई है जब पादरी एक अन्य यौन उत्पीड़न के मामले में जांच का सामना कर रहा है। 28 फरवरी को कपूरथला पुलिस ने उसके खिलाफ एक 22 वर्षीय महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
इसके अलावा, मोहाली पुलिस ने 25 मार्च को बजिंदर सिंह के खिलाफ मारपीट और अन्य आरोपों में भी मामला दर्ज किया। कुछ दिन पहले उसका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर एक महिला से बहस कर रहा था और उसे थप्पड़ मार रहा था।
बजिंदर सिंह ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। हालांकि, अदालत के इस फैसले को पीड़िता और अन्य महिलाओं की जीत के रूप में देखा जा रहा है।