गणतंत्र दिवस 2025: सामाजिक न्याय मंत्रालय की झांकी में झलकी भारतीय संविधान की गौरवशाली यात्रा
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झांकी का मुख्य आकर्षण भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रतिकृति और श्री नंदलाल बोस की कलाकृतियों के साथ मूर्तिकला पैनल थे। विविध क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए जीवंत दृश्य झांकी को और आकर्षक बनाते हैं।
झांकी में हड़प्पा की मुहर से प्रेरित ज़ेबू बैल, अशोक की लाट और घूमता हुआ चक्र जैसे प्रतीक शामिल हैं, जो शक्ति, नेतृत्व, लचीलापन, एकता और निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की गणतंत्र दिवस 2025 की झांकी ने कर्तव्यपथ पर पूर्वाभ्यास के दौरान दर्शकों का दिल जीत लिया। यह झांकी भारतीय संविधान की 75 वर्षों की यात्रा को प्रदर्शित करती है, जिसमें न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के संदेशों को अनूठे तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
झांकी में हड़प्पा की मुहर से प्रेरित ज़ेबू बैल, अशोक की लाट और घूमता हुआ चक्र जैसे प्रतीक शामिल हैं, जो शक्ति, नेतृत्व, लचीलापन, एकता और निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं। किनारों पर बनी आकृतियाँ आप्टिक्स के सिद्धांत का उपयोग करती हैं, जिससे एकता और भाईचारे का संदेश दर्शकों तक पहुंचाया गया।
झांकी का मुख्य आकर्षण भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रतिकृति और श्री नंदलाल बोस की कलाकृतियों के साथ मूर्तिकला पैनल थे। विविध क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए जीवंत दृश्य झांकी को और आकर्षक बनाते हैं।
यह झांकी भारतीय संविधान की मूल भावना और इसके सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व का सम्मान करती है। गणतंत्र दिवस पर इसे आधिकारिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।