राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार जी की जयंती
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नागपुर/ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। डॉ. हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल, 1889 को नागपुर के एक निर्धन परिवार में हुआ था। था। उनके पिता श्री बलिराम पंत और माता श्रीमती रेवतीबाई थीं।
आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है, जिसकी शाखाएं विश्व के विभिन्न देशों में भी सक्रिय हैं। डॉ. हेडगेवार द्वारा बोया गया यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो राष्ट्र सेवा, समाज सुधार और संस्कृति संरक्षण के कार्यों में अग्रसर है। उनकी जयंती पर समर्पित स्वयंसेवक उन्हें नमन कर उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।
नागपुर/ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। डॉ. हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल, 1889 को नागपुर के एक निर्धन परिवार में हुआ था। था। उनके पिता श्री बलिराम पंत और माता श्रीमती रेवतीबाई थीं। उनका प्रारंभिक जीवन राष्ट्रभक्ति और देशसेवा की प्रेरणा से ओतप्रोत था। उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई कोलकाता से पूरी की, लेकिन उनका हृदय क्रांतिकारी गतिविधियों की ओर अधिक आकर्षित था। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहते हुए उन्होंने कांग्रेस के साथ भी कार्य किया, परंतु उन्हें यह महसूस हुआ कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है, जब तक हिंदू समाज संगठित नहीं होता। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर 1925 में विजयादशमी के दिन उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ की शाखा प्रणाली को प्रारंभ कर उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने का एक अनोखा और प्रभावी माध्यम तैयार किया। संघ की शाखाओं में प्रतिदिन एकत्र होकर स्वयंसेवक शारीरिक व्यायाम, खेलकूद, देशभक्ति के गीत और महापुरुषों की कथाओं के माध्यम से स्वयं को राष्ट्रसेवा के लिए तैयार करते हैं। प्रारंभ में लोगों ने इस पद्धति को लेकर संदेह जताया, लेकिन डॉ. हेडगेवार अडिग रहे और धीरे-धीरे संघ पूरे महाराष्ट्र से निकलकर भारत के हर कोने में फैल गया। उन्होंने संघ को सशक्त बनाने के लिए पूरे देश में प्रवास किया और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत युवाओं को इससे जोड़ा। अत्यधिक परिश्रम के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और 21 जून 1940 को उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। उनके निधन से पहले उन्होंने संघ की बागडोर माधवराव गोलवलकर ‘श्री गुरुजी’ को सौंप दी, जिनके नेतृत्व में संघ और अधिक विस्तृत हुआ। आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है, जिसकी शाखाएं विश्व के विभिन्न देशों में भी सक्रिय हैं। डॉ. हेडगेवार द्वारा बोया गया यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो राष्ट्र सेवा, समाज सुधार और संस्कृति संरक्षण के कार्यों में अग्रसर है। उनकी जयंती पर समर्पित स्वयंसेवक उन्हें नमन कर उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।