तमिलनाडु सरकार का ऐतिहासिक फैसला: बजट से हटाया रुपये का प्रतीक चिन्ह

Sat 15-Mar-2025,09:00 PM IST +05:30

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तमिलनाडु सरकार का ऐतिहासिक फैसला: बजट से हटाया रुपये का प्रतीक चिन्ह
  • स्टालिन सरकार का यह फैसला तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव भी हो सकते हैं। 

  • तमिलनाडु सरकार का यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के विरोध में उठाया गया है। डीएमके सरकार ने पहले ही इस नीति को लागू करने से इनकार कर दिया था। 

  • इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत तमिलनाडु को मिलने वाली 573 करोड़ रुपये की सहायता राशि रोक दी। 

Tamil Nadu / :

तमिलनाडु​/ तमिलनाडु सरकार ने अपने 2025-26 के बजट में एक बड़ा बदलाव किया है। राज्य सरकार ने भारतीय मुद्रा के आधिकारिक प्रतीक (₹) को हटाकर उसकी जगह तमिल भाषा के प्रतीक को शामिल किया है। यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्य ने राष्ट्रीय मुद्रा चिन्ह को नकारते हुए अपनी क्षेत्रीय भाषा को प्राथमिकता दी है।

स्टालिन सरकार का यह फैसला तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव भी हो सकते हैं। राज्य सरकार के इस निर्णय से केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच पहले से चल रहा टकराव और बढ़ सकता है।

राजनीतिक विवाद और हिंदी थोपने का विरोध

तमिलनाडु सरकार का यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के विरोध में उठाया गया है। डीएमके सरकार ने पहले ही इस नीति को लागू करने से इनकार कर दिया था। NEP 2020 के तहत केंद्र सरकार ने तीन-भाषा नीति लागू की, लेकिन तमिलनाडु सरकार का कहना है कि इससे राज्य के लोगों पर हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है।

इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत तमिलनाडु को मिलने वाली 573 करोड़ रुपये की सहायता राशि रोक दी। SSA के फंडिंग नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार 60% राशि देती है और इसके लिए राज्यों को NEP 2020 के नियमों का पालन करना जरूरी है।

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह फैसला राज्य की पहचान और भाषा की रक्षा के लिए जरूरी है। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र सरकार शिक्षा नीति के माध्यम से तमिल संस्कृति और पहचान को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

केंद्रीय सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने कहा,

"डीएमके सरकार इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। NEP 2020 का विरोध तमिल भाषा या संस्कृति की सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक स्टंट है।"

रुपये का आधिकारिक प्रतीक और उसका महत्व

भारतीय रुपये (₹) का प्रतीक 15 जुलाई 2010 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया था। इसे उदय कुमार धरणी ने डिजाइन किया था। यह देवनागरी "र" और रोमन "R" का मेल है, जिसमें ऊपर तिरंगे को दर्शाने वाली दो सीधी लाइनें जोड़ी गई हैं।

₹ का यूनिकोड U+20B9 है, जिससे इसे डिजिटल और वित्तीय दस्तावेजों में आसानी से इस्तेमाल किया जाता है। यह चिन्ह डॉलर ($), यूरो (€) और पाउंड (£) जैसे वैश्विक मुद्राओं के प्रतीकों की तरह भारत की आर्थिक पहचान को दर्शाता है।

2010 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रुपये के लिए एक प्रतीक चिन्ह लाने की घोषणा की, तो एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता कराई गई थी। इसमें कई डिजाइनों में से ₹ को चुना गया और इसे भारतीय नोटों व सिक्कों में शामिल किया गया। 8 जुलाई 2011 को पहली बार ₹ चिन्ह वाले सिक्के जारी किए गए।

तमिलनाडु सरकार के फैसले के संभावित प्रभाव

तमिलनाडु सरकार के इस फैसले से संवैधानिक और आर्थिक बहस छिड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये के राष्ट्रीय प्रतीक को हटाना केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।

यह कदम तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्वतंत्रता को दर्शाने की कोशिश भी हो सकता है। राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था और वित्तीय नीतियों पर स्वायत्तता बनाए रखना चाहती है।

तमिलनाडु सरकार द्वारा रुपये के प्रतीक चिन्ह को हटाने का फैसला ऐतिहासिक है, लेकिन इसका असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों, राजनीतिक बहस और आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

अब सवाल यह है कि क्या अन्य राज्य भी इसी तरह अपनी क्षेत्रीय पहचान को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय प्रतीकों में बदलाव करेंगे, या यह सिर्फ तमिलनाडु सरकार की एक अलग रणनीति है?