दिल्ली विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश: केजरीवाल सरकार की शराब नीति पर बड़ा खुलासा!

Tue 25-Feb-2025,08:12 PM IST +05:30

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दिल्ली विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश: केजरीवाल सरकार की शराब नीति पर बड़ा खुलासा!
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति से सरकार को ₹2,002 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। इसके अलावा, शीश महल की कीमत में 342% की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे भ्रष्टाचार के आरोप और गहरे हो गए हैं।

  • बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह आबकारी नीति नहीं, बल्कि "AAP सरकार की किकबैक स्कीम" थी, जिससे दिल्ली को शराब माफिया के हवाले कर दिया गया।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ दिल्ली विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) की शराब नीति को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति से सरकार को ₹2,002 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। इसके अलावा, शीश महल की कीमत में 342% की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे भ्रष्टाचार के आरोप और गहरे हो गए हैं।

केजरीवाल सरकार का ₹2,026 करोड़ का शराब घोटाला!

CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP सरकार की आबकारी नीति के कारण दिल्ली के करदाताओं को भारी नुकसान हुआ, जबकि पार्टी के नेताओं को फायदा पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आबकारी नीति को इस तरह से तैयार किया गया कि इससे चुनिंदा विक्रेताओं और कंपनियों को लाभ मिले, जिससे दिल्ली सरकार को भारी आर्थिक हानि हुई।

CAG रिपोर्ट के मुख्य खुलासे:

🔹 राजस्व नुकसान: हेरफेर और अवैध छूट के कारण दिल्ली सरकार को ₹2,026 करोड़ का घाटा हुआ।

🔹 विशेषज्ञ पैनल की अनदेखी: मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता वाले समूह (GOM) ने आबकारी नीति पर विशेषज्ञों की सिफारिशों को नजरअंदाज किया।

🔹 बोलियों की कोई जांच नहीं: घाटे में चल रही कंपनियों को भी लाइसेंस दे दिए गए, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और बढ़ गई।

🔹 लाइसेंसिंग में धांधली: नियमों के उल्लंघन के बावजूद डिफॉल्टरों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।

🔹 गैरकानूनी छूट: चुनिंदा विक्रेताओं को ₹941 करोड़ की छूट दी गई, जो नियमों के विरुद्ध थी।

🔹 लाइसेंस शुल्क में छूट: ठेकेदारों को अनुबंध की शर्तों के बावजूद ₹144 करोड़ का फायदा पहुंचाया गया।

🔹 सिक्योरिटी डिपॉजिट में गड़बड़ी: गलत संग्रहण के कारण सरकार को ₹27 करोड़ की हानि हुई।

🔹 थोक विक्रेताओं और ज़ोनल लाइसेंसधारियों की मिलीभगत: दिल्ली में शराब का अवैध सिंडिकेट बनाया गया, जिससे आम जनता को नुकसान हुआ।

🔹 लैब और गुणवत्ता जांच नहीं हुई: शराब की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे जनता की सेहत पर खतरा मंडराने लगा।

CAG रिपोर्ट पेश करने में हुई देरी पर विधानसभा अध्यक्ष का बयान

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा, "यह जानकर हैरानी होती है कि 2017-18 के बाद से CAG रिपोर्ट को विधानसभा में पेश नहीं किया गया। इस संबंध में, तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष यानी मैं और पांच अन्य विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया था। राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए यह रिपोर्ट अत्यंत आवश्यक थी। दुर्भाग्यवश, CAG रिपोर्ट को पेश नहीं किया गया, जिससे पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया।"

AAP सरकार की आबकारी नीति पर सवाल

विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने केजरीवाल सरकार पर तीखा हमला बोला। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह आबकारी नीति नहीं, बल्कि "AAP सरकार की किकबैक स्कीम" थी, जिससे दिल्ली को शराब माफिया के हवाले कर दिया गया।

अब सवाल उठता है कि क्या CAG रिपोर्ट के इन खुलासों के बाद केजरीवाल सरकार पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी? क्या जनता से किए गए वादों को दरकिनार कर AAP सरकार ने दिल्लीवासियों को ठगने का काम किया? यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।