चेन्नई में ‘FAIR DELIMITATION’ बैठक: दक्षिणी राज्यों की आवाज़
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इस बैठक में केरल, तेलंगाना और पंजाब के मुख्यमंत्रियों सहित कई राजनीतिक नेता शामिल हुए।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने सभा को तमिल में संबोधित किया, लेकिन कनिमोझी और उदयनिधि ने अंग्रेजी में भाषण दिया।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे "संविधान के सिद्धांतों की बजाय संकीर्ण राजनीतिक लाभ" के लिए उठाया गया कदम बताया।
इससे पहले, चेन्नई के नमक्कल कविग्नर हॉल में हुई एक सर्वदलीय बैठक में 123 राजनीतिक दलों ने इस बात पर सहमति जताई कि तमिलनाडु केवल जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन का विरोध करेगा।
चेन्नई/ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन आज शनिवार को परिसीमन प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले राज्यों के लिए पहली संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) बैठक की मेजबानी कर रहे हैं। यह बैठक चेन्नई के आईटीसी चोला में आयोजित की जा रही है। इससे पहले, इसी मुद्दे पर 5 मार्च को चेन्नई में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद इस JAC बैठक का आह्वान किया गया। शनिवार को बैठक से पहले, स्टालिन ने X (ट्विटर) पर एक पोस्ट में सभी भाग लेने वाले नेताओं का स्वागत करते हुए लिखा: "आज का दिन इतिहास में उस दिन के रूप में दर्ज होगा जब हमारे देश के विकास में योगदान देने वाले राज्य एक साथ आए, ताकि Fair Delimitation सुनिश्चित करके देश की संघीय संरचना की रक्षा की जा सके।"
चेन्नई में परिसीमन को लेकर विपक्षी दलों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें ‘FAIR DELIMITATION’ का बोर्ड चेन्नई नगर निगम भवन के बाहर देखा गया। इस बैठक को ‘Fair Delimitation’ बैठक के रूप में घोषित किया गया था, जिसमें केरल, तेलंगाना और पंजाब के मुख्यमंत्रियों सहित कई राजनीतिक नेता शामिल हुए। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी इस बैठक में भाग लिया। बैठक स्थल पर मौजूद नामपट्टिकाएँ अंग्रेजी के साथ-साथ संबंधित नेताओं की क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रदर्शित की गई थीं।
उदाहरण के लिए, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का नाम अंग्रेजी और तमिल में, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का नाम अंग्रेजी और ते लुगु में, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम अंग्रेजी और मलयालम में, और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम अंग्रेजी और पंजाबी में लिखा गया था। हालाँकि मुख्यमंत्री स्टालिन ने सभा को तमिल में संबोधित किया, लेकिन कनिमोझी और उदयनिधि ने अंग्रेजी में भाषण दिया। केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने भी अंग्रेजी में अपने विचार रखे।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इस बैठक को एक ‘‘ऐतिहासिक क्षण’’ करार देते हुए कहा कि यदि तमिलनाडु और अन्य राज्यों की संसदीय सीटें परिसीमन के कारण कम होती हैं, तो यह भारत के संघीय ढांचे के लिए एक बड़ा झटका होगा। उन्होंने कहा, "परिसीमन उन राज्यों को नुकसान पहुंचाएगा जिन्होंने सफलतापूर्वक परिवार नियोजन लागू किया है। यही कारण है कि हम इसका विरोध कर रहे हैं।" उन्होंने मणिपुर की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य दो वर्षों से जल रहा है, लेकिन वहां की आवाज़ संसद में नहीं उठ रही क्योंकि उनकी पर्याप्त संसदीय प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि "हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि हम एक निष्पक्ष परिसीमन की मांग कर रहे हैं।" स्टालिन ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोयंबटूर में परिसीमन को "प्रो-राटा आधार" पर करने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्टता नहीं दी कि इससे राज्यों की सीटें कम होंगी या नहीं। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इस बैठक को ‘Fair Delimitation Joint Action Group’ का नाम दिया जाए।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे "संविधान के सिद्धांतों की बजाय संकीर्ण राजनीतिक लाभ" के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो दक्षिणी राज्यों की संसदीय सीटें कम हो जाएंगी और उन्हें परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए दंडित किया जाएगा। विजयन ने परिसीमन को "हमारे सिर पर लटकी तलवार" बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया उत्तरी राज्यों को अनुचित लाभ देगी, जहां भाजपा का अधिक प्रभाव है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अब आपकी जनसंख्या कम है, तो आपको कम फंड और कम संसदीय प्रतिनिधित्व मिलेगा। यह निंदनीय है।"
तमिलनाडु भाजपा ने इस बैठक का कड़ा विरोध किया और राज्यभर में काले झंडों के साथ प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन से पहले राज्य भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि उन्हें अन्य राज्यों के साथ तमिलनाडु के मुद्दों, जैसे कि केरल से कचरा डंपिंग और कावेरी व मेकेदातु जल विवाद पर चर्चा करनी चाहिए थी।
इससे पहले, चेन्नई के नमक्कल कविग्नर हॉल में हुई एक सर्वदलीय बैठक में 123 राजनीतिक दलों ने इस बात पर सहमति जताई कि तमिलनाडु केवल जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन का विरोध करेगा। हालांकि, भाजपा ने इस बैठक का बहिष्कार किया था। स्टालिन ने इस बैठक के लिए तमाम दक्षिण भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर आमंत्रित किया था। कई राज्यों के अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था।