महाराष्ट्र विधान परिषद उपचुनाव: बीजेपी ने घोषित किए उम्मीदवार
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चुनाव आयोग के अनुसार, 27 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और मतगणना शाम 5 बजे से शुरू होगी। 29 मार्च तक उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी।
महाराष्ट्र विधान परिषद की ये पांच सीटें अमाशा पडवी, प्रवीण दटके, राजेश विटेकर, रमेश कराड और गोपीचंद पडलकर के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई हैं।
महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सदस्य होते हैं, जिनमें से 66 सदस्य मतदान प्रक्रिया से चुने जाते हैं और 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
महाराष्ट्र/ महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच खाली सीटों पर उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने संदीप दिवाकर राव जोशी, संजय किशनराव केनेकर और दादाराव यादवराव केचे को अपना उम्मीदवार बनाया है। चुनाव आयोग ने इस महीने की शुरुआत में इन पांच सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा की थी। ये सीटें उन विधान पार्षदों के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, 27 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और मतगणना शाम 5 बजे से शुरू होगी। 29 मार्च तक उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी।
उपचुनाव की प्रमुख तिथियां
चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक:
10 मार्च: उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी
17 मार्च: नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि
18 मार्च: नामांकन पत्रों की जांच
20 मार्च: नाम वापसी की अंतिम तिथि
27 मार्च: मतदान (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक)
27 मार्च: मतगणना (शाम 5 बजे से)
29 मार्च: उपचुनाव प्रक्रिया समाप्त
कौन-कौन सी सीटें हैं खाली?
महाराष्ट्र विधान परिषद की ये पांच सीटें अमाशा पडवी, प्रवीण दटके, राजेश विटेकर, रमेश कराड और गोपीचंद पडलकर के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई हैं।
महाराष्ट्र विधान परिषद का ढांचा
महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सदस्य होते हैं, जिनमें से 66 सदस्य मतदान प्रक्रिया से चुने जाते हैं और 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का ऊपरी सदन होता है, जिसमें विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है।
बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवारों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य दल इन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारते हैं या नहीं। आगामी 27 मार्च को मतदान और मतगणना के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।