बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, विकास और पुनर्वास योजनाओं का असर

Tue 18-Mar-2025,02:09 PM IST +05:30

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बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, विकास और पुनर्वास योजनाओं का असर
  • सोमवार को PLGA बटालियन नंबर 01 के पीपीसीएम और 8 लाख रुपये के इनामी नक्सली देवा पदम ने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। 

  • बीजापुर जिले में हो रहे विकास कार्य, नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना और शासन की पुनर्वास नीति इस आत्मसमर्पण के पीछे मुख्य कारण रहे हैं। 

  • आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।

  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में अब तक कुल 84 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा, 137 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं और विभिन्न मुठभेड़ों में 56 माओवादी मारे गए हैं।

Chhattisgarh / Bijapur :

बीजापुर/ छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सोमवार को PLGA बटालियन नंबर 01 के पीपीसीएम और 8 लाख रुपये के इनामी नक्सली देवा पदम ने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही AOB डिवीजन एवं पामेड़ एरिया कमेटी के 28 लाख रुपये के इनामी 9 माओवादी समेत कुल 19 नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

बड़े स्तर पर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली

आत्मसमर्पण करने वालों में PLGA बटालियन के PPCM-02, पामेड़ एरिया कमेटी के ACM-01, AOB डिवीजन की प्लाटून नंबर 01 की पार्टी सदस्या, मिलिशिया प्लाटून कमांडर, जनताना सरकार अध्यक्ष, डीएकेएमएस अध्यक्ष, मिलिशिया प्लाटून डिप्टी कमांडर और अन्य सदस्य शामिल हैं।

बीजापुर जिले में हो रहे विकास कार्य, नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना और शासन की पुनर्वास नीति इस आत्मसमर्पण के पीछे मुख्य कारण रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और परिवहन की बेहतर सुविधाओं ने भी नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।

सरकार की पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण की वजह

बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने और पुनर्वास योजना का लाभ उठाने का अवसर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।

नक्सली संगठन में आंतरिक मतभेद, विचारधारा से मोहभंग और लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के कारण भी बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार, शिक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की व्यवस्था की जा रही है।

नक्सल उन्मूलन अभियान के ताजा आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में अब तक कुल 84 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा, 137 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं और विभिन्न मुठभेड़ों में 56 माओवादी मारे गए हैं।

सरकार और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का कहना है कि नक्सली संगठनों में विचारधारा और नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं, जिससे वे अब संगठन से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।

बीजापुर जिले में हुए इस आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन अभियान की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। सरकार की पुनर्वास योजनाएं, सुरक्षाबलों की सख्ती और ग्रामीण इलाकों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों की वजह से नक्सली हिंसा में लगातार कमी आ रही है। आने वाले दिनों में और भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने की संभावना जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौटने की उम्मीद है।